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बाँस केवन जंगल और पर्वत तलहटियों में उत्पन्न होते हैं | फूल सफेद आता है ,बाँस में वंशलोचन निकलता है | कभी-कभी बाँस पर जौ आते हैं | उन जौ में से चावल निकलता है | उसका भात बनाया जाता है |
गुणबाँस खट्टा , कसैला ,शीतल, सारक ,स्वादिष्ट ,छेदक ,भेदक तथा कफ ,रक्तविकार ,पित्त ,कुष्ट,शोथ्,व्रण ,मूत्र कृच्छ्र , प्रमेह ,अर्श और दाह को दूर करता है | बाँस के अँकुरये पचने में चरपरे ,कडुवे ,रूक्ष ,खट्टे ,कसैले ,भारी,सारक, स्वादु,और शीतल हैं | ये रक्त पित्त , दाह ,मूत्र कृच्छ्र और वातादि रोगों को नष्ट करता है | बाँस के चावलकसैले ,मधुर ,पुष्टिकारक ,बलवर्धक ,उष्ण ,सारक ,रूक्ष एवं कडुवे हैं ,कफ,पित्त ,विष ,प्रमेह ,मूत्रकृच्छ्र और मूत्र रोग नाशक है | दोनो प्रकार के बाँस - (बाँस और रंध्र बाँस ) खट्टे ,कसैले,किचिंत कडुवे,शीतल तथा मूत्रकृच्छ्र , प्रमेह ,अर्श ,पित्त दाह और रक्तविकार नाशक है | रंध्र बाँस विशेष करके अग्नी प्रदीपक ,हृदय हितकारक ,तथा शूल तथा गुल्म विनाशक है | विवरणनाम सं - वंश हिं - बाँस बं-बाँस म-बेलू गु- बाँस फा-कसब अं- बम्बूकेन सन्दर्भ
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